सज़ा ….

हमने तो उन्हें बेझिझक बोलने की इजाज़त दी थीओर वो बिन सोचे समझे बोलने की गु़स्ताखी कर बैठे अंजाम कुछ यूँ हुआ किजिस दोस्ती के सहारे कभी जिए थे हम,अब लगने लगा कि हमने कोई गलती तो नही करदी ? दुख तो इस बात का है कि उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि उनसे खताContinue reading “सज़ा ….”

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